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mahabharat 9.12.55-56h: श्रेष्ठ! इस प्रकार कुन्तीकुमार ने युद्ध में विचरण करते हुए राजा शल्य को लक्ष्य करके विषैले सर्पों के समान भयंकर एवं तीखे बाण छोड़े ॥55 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 9.12: भीमसेन और शल्यका भयानक गदायुद्ध तथा युधिष्ठिरके साथ शल्यका युद्ध, दुर्योधनद्वारा चेकितानका और युधिष्ठिरद्वारा चन्द्रसेन एवं द्रुमसेनका वध, पुन: युधिष्ठिर और माद्रीपुत्रोंके साथ शल्यका युद्ध   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 12: भीमसेन और शल्यका भयानक गदायुद्ध तथा युधिष्ठिरके साथ शल्यका युद्ध, दुर्योधनद्वारा चेकितानका और युधिष्ठिरद्वारा चन्द्रसेन एवं द्रुमसेनका वध, पुन: युधिष्ठिर और माद्रीपुत्रोंके साथ शल्यका युद्ध  »  श्लोक 55-56h
 
 
श्लोक  9.12.55-56h 
एवं विचरतस्तस्य संग्रामे राजसत्तम॥ ५५॥
सम्प्रैषयच्छितान् पार्थ: शरानाशीविषोपमान्।
 
 
अनुवाद
श्रेष्ठ! इस प्रकार कुन्तीकुमार ने युद्ध में विचरण करते हुए राजा शल्य को लक्ष्य करके विषैले सर्पों के समान भयंकर एवं तीखे बाण छोड़े ॥55 1/2॥
 
The best! In this way, Kuntikumar aimed at King Shalya, who was moving in the battle, and fired arrows as fierce and sharp as poisonous snakes. 55 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)