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mahabharat 9.12.54-55h: फिर उन्होंने युद्धस्थल में सात्यकि को पच्चीस बाणों से, भीमसेन को पाँच बाणों से तथा माद्री के पुत्रों को सौ तीखे बाणों से घायल कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 9.12: भीमसेन और शल्यका भयानक गदायुद्ध तथा युधिष्ठिरके साथ शल्यका युद्ध, दुर्योधनद्वारा चेकितानका और युधिष्ठिरद्वारा चन्द्रसेन एवं द्रुमसेनका वध, पुन: युधिष्ठिर और माद्रीपुत्रोंके साथ शल्यका युद्ध   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 12: भीमसेन और शल्यका भयानक गदायुद्ध तथा युधिष्ठिरके साथ शल्यका युद्ध, दुर्योधनद्वारा चेकितानका और युधिष्ठिरद्वारा चन्द्रसेन एवं द्रुमसेनका वध, पुन: युधिष्ठिर और माद्रीपुत्रोंके साथ शल्यका युद्ध  »  श्लोक 54-55h
 
 
श्लोक  9.12.54-55h 
सात्यकिं पञ्चविंशत्या भीमसेनं च पञ्चभि:॥ ५४॥
माद्रीपुत्रौ शतेनाजौ विव्याध निशितै: शरै:।
 
 
अनुवाद
फिर उन्होंने युद्धस्थल में सात्यकि को पच्चीस बाणों से, भीमसेन को पाँच बाणों से तथा माद्री के पुत्रों को सौ तीखे बाणों से घायल कर दिया।
 
Then he injured Satyaki with twenty-five arrows, Bhimasena with five arrows and Madri's sons with a hundred sharp arrows on the battlefield.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)