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mahabharat 9.12.52-53h: इसके बाद महारथी युधिष्ठिर ने सत्तर बाणों से चन्द्रसेन को, नौ बाणों से शल्य के सारथि को तथा चौसठ बाणों से द्रुमसेन को मार डाला।   |   mahabharat अध्याय 9.12: भीमसेन और शल्यका भयानक गदायुद्ध तथा युधिष्ठिरके साथ शल्यका युद्ध, दुर्योधनद्वारा चेकितानका और युधिष्ठिरद्वारा चन्द्रसेन एवं द्रुमसेनका वध, पुन: युधिष्ठिर और माद्रीपुत्रोंके साथ शल्यका युद्ध   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 12: भीमसेन और शल्यका भयानक गदायुद्ध तथा युधिष्ठिरके साथ शल्यका युद्ध, दुर्योधनद्वारा चेकितानका और युधिष्ठिरद्वारा चन्द्रसेन एवं द्रुमसेनका वध, पुन: युधिष्ठिर और माद्रीपुत्रोंके साथ शल्यका युद्ध  »  श्लोक 52-53h
 
 
श्लोक  9.12.52-53h 
चन्द्रसेनं च सप्तत्या सूतं च नवभि: शरै:॥ ५२॥
द्रुमसेनं चतु:षष्टॺा निजघान महारथ:।
 
 
अनुवाद
इसके बाद महारथी युधिष्ठिर ने सत्तर बाणों से चन्द्रसेन को, नौ बाणों से शल्य के सारथि को तथा चौसठ बाणों से द्रुमसेन को मार डाला।
 
After this, the great warrior Yudhishthira killed Chandrasena with seventy arrows, Shalya's charioteer with nine arrows and Drumasena with sixty-four arrows. 52 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)