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mahabharat 9.12.49-50h: महाबली शल्य ने पाण्डुपुत्र युधिष्ठिर को रोककर मार डालने की इच्छा से युद्धस्थल में उन पर कंकण लगे हुए अनेक बाणों से क्रोधपूर्वक आक्रमण करना आरम्भ कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 9.12: भीमसेन और शल्यका भयानक गदायुद्ध तथा युधिष्ठिरके साथ शल्यका युद्ध, दुर्योधनद्वारा चेकितानका और युधिष्ठिरद्वारा चन्द्रसेन एवं द्रुमसेनका वध, पुन: युधिष्ठिर और माद्रीपुत्रोंके साथ शल्यका युद्ध   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 12: भीमसेन और शल्यका भयानक गदायुद्ध तथा युधिष्ठिरके साथ शल्यका युद्ध, दुर्योधनद्वारा चेकितानका और युधिष्ठिरद्वारा चन्द्रसेन एवं द्रुमसेनका वध, पुन: युधिष्ठिर और माद्रीपुत्रोंके साथ शल्यका युद्ध  »  श्लोक 49-50h
 
 
श्लोक  9.12.49-50h 
आवार्य पाण्डवं बाणैर्हन्तुकामो महाबल:॥ ४९॥
विव्याध समरे क्रुद्धो बहुभि: कङ्कपत्रिभि:।
 
 
अनुवाद
महाबली शल्य ने पाण्डुपुत्र युधिष्ठिर को रोककर मार डालने की इच्छा से युद्धस्थल में उन पर कंकण लगे हुए अनेक बाणों से क्रोधपूर्वक आक्रमण करना आरम्भ कर दिया।
 
The great Shalya, wishing to stop Pandu's son Yudhishthir and kill him, started angrily attacking him in the battle field with many arrows tipped with pebbles.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)