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mahabharat 9.12.48-49h: महाराज! ज्ञानी कुन्तीपुत्र ने हँसते हुए शल्य के नाभिस्थानों पर निशाना साधकर चौदह बाण छोड़े और उन्हें उसके शरीर में गड़ा दिया।   |   mahabharat अध्याय 9.12: भीमसेन और शल्यका भयानक गदायुद्ध तथा युधिष्ठिरके साथ शल्यका युद्ध, दुर्योधनद्वारा चेकितानका और युधिष्ठिरद्वारा चन्द्रसेन एवं द्रुमसेनका वध, पुन: युधिष्ठिर और माद्रीपुत्रोंके साथ शल्यका युद्ध   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 12: भीमसेन और शल्यका भयानक गदायुद्ध तथा युधिष्ठिरके साथ शल्यका युद्ध, दुर्योधनद्वारा चेकितानका और युधिष्ठिरद्वारा चन्द्रसेन एवं द्रुमसेनका वध, पुन: युधिष्ठिर और माद्रीपुत्रोंके साथ शल्यका युद्ध  »  श्लोक 48-49h
 
 
श्लोक  9.12.48-49h 
तस्य पार्थो महाराज नाराचान् वै चतुर्दश॥ ४८॥
मर्माण्युद्दिश्य मर्मज्ञो निचखान हसन्निव।
 
 
अनुवाद
महाराज! ज्ञानी कुन्तीपुत्र ने हँसते हुए शल्य के नाभिस्थानों पर निशाना साधकर चौदह बाण छोड़े और उन्हें उसके शरीर में गड़ा दिया।
 
Maharaj! The knowledgeable son of Kunti smilingly aimed at Shalya's vital spots and shot fourteen arrows and embedded them in his body.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)