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श्री महाभारत
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पर्व 9: शल्य पर्व
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अध्याय 12: भीमसेन और शल्यका भयानक गदायुद्ध तथा युधिष्ठिरके साथ शल्यका युद्ध, दुर्योधनद्वारा चेकितानका और युधिष्ठिरद्वारा चन्द्रसेन एवं द्रुमसेनका वध, पुन: युधिष्ठिर और माद्रीपुत्रोंके साथ शल्यका युद्ध
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श्लोक 47-48h
श्लोक
9.12.47-48h
तत: शल्यो महाराज धर्मपुत्रं युधिष्ठिरम्॥ ४७॥
विव्याध निशितैर्बाणैर्हन्तुकामो महारथम्।
अनुवाद
महाराज ! तत्पश्चात् राजा शल्य ने महारथी धर्मपुत्र राजा युधिष्ठिर को मार डालने की इच्छा से उन्हें तीखे बाणों से बींध डाला ॥47 1/2॥
Maharaj! Thereafter, King Shalya, wishing to kill King Yudhishthira, the son of the great warrior Dharma, pierced him with sharp arrows. 47 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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