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mahabharat 9.12.43-44h: सभी का उद्देश्य ब्रह्मलोक की प्राप्ति था। वे सभी सैनिक युद्ध में विजय चाहते थे और महायुद्ध में पराक्रम दिखाकर स्वर्ग प्राप्ति की कामना करते थे।   |   mahabharat अध्याय 9.12: भीमसेन और शल्यका भयानक गदायुद्ध तथा युधिष्ठिरके साथ शल्यका युद्ध, दुर्योधनद्वारा चेकितानका और युधिष्ठिरद्वारा चन्द्रसेन एवं द्रुमसेनका वध, पुन: युधिष्ठिर और माद्रीपुत्रोंके साथ शल्यका युद्ध   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 12: भीमसेन और शल्यका भयानक गदायुद्ध तथा युधिष्ठिरके साथ शल्यका युद्ध, दुर्योधनद्वारा चेकितानका और युधिष्ठिरद्वारा चन्द्रसेन एवं द्रुमसेनका वध, पुन: युधिष्ठिर और माद्रीपुत्रोंके साथ शल्यका युद्ध  »  श्लोक 43-44h
 
 
श्लोक  9.12.43-44h 
ब्रह्मलोकपरा भूत्वा प्रार्थयन्तो जयं युधि॥ ४३॥
सुयुद्धेन पराक्रान्ता नरा: स्वर्गमभीप्सव:।
 
 
अनुवाद
सभी का उद्देश्य ब्रह्मलोक की प्राप्ति था। वे सभी सैनिक युद्ध में विजय चाहते थे और महायुद्ध में पराक्रम दिखाकर स्वर्ग प्राप्ति की कामना करते थे।
 
Everyone's aim was to attain Brahmlok. All those soldiers wanted victory in the war and wished to attain heaven by showing valour in a great war.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)