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mahabharat 9.12.41-42h: पुरुषसिंह! उस समय इतना रक्त बहा कि सारी धूल बैठ गई। धूलजनित अंधकार नष्ट हो जाने पर सभी दिशाएँ स्वच्छ हो गईं।   |   mahabharat अध्याय 9.12: भीमसेन और शल्यका भयानक गदायुद्ध तथा युधिष्ठिरके साथ शल्यका युद्ध, दुर्योधनद्वारा चेकितानका और युधिष्ठिरद्वारा चन्द्रसेन एवं द्रुमसेनका वध, पुन: युधिष्ठिर और माद्रीपुत्रोंके साथ शल्यका युद्ध   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 12: भीमसेन और शल्यका भयानक गदायुद्ध तथा युधिष्ठिरके साथ शल्यका युद्ध, दुर्योधनद्वारा चेकितानका और युधिष्ठिरद्वारा चन्द्रसेन एवं द्रुमसेनका वध, पुन: युधिष्ठिर और माद्रीपुत्रोंके साथ शल्यका युद्ध  »  श्लोक 41-42h
 
 
श्लोक  9.12.41-42h 
तद्रज: पुरुषव्याघ्र शोणितेन प्रशामितम्॥ ४१॥
दिशश्च विमला जातास्तस्मिंस्तमसि नाशिते।
 
 
अनुवाद
पुरुषसिंह! उस समय इतना रक्त बहा कि सारी धूल बैठ गई। धूलजनित अंधकार नष्ट हो जाने पर सभी दिशाएँ स्वच्छ हो गईं।
 
Purushsingh! So much blood was shed at that time that all the dust settled down. After the dust-borne darkness was destroyed, all directions became clean.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)