श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 12: भीमसेन और शल्यका भयानक गदायुद्ध तथा युधिष्ठिरके साथ शल्यका युद्ध, दुर्योधनद्वारा चेकितानका और युधिष्ठिरद्वारा चन्द्रसेन एवं द्रुमसेनका वध, पुन: युधिष्ठिर और माद्रीपुत्रोंके साथ शल्यका युद्ध  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  9.12.4 
तत: शङ्खप्रणादश्च तूर्याणां च सहस्रश:।
सिंहनादश्च संजज्ञे शूराणां हर्षवर्धन:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
फिर शंखों की ध्वनि, हजारों वाद्यों का गगनभेदी शोर और योद्धाओं की हर्षपूर्ण गर्जना सर्वत्र गूंजने लगी।
 
Then the sound of conches, the deep noise of thousands of musical instruments and the joyous roar of warriors started resonating everywhere.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)