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mahabharat 9.12.33-34h: महाराज! विजय से प्रसन्न होकर पाण्डव आपकी सेना में निर्भय होकर विचरण करते थे। उस समय वे देखने योग्य थे।   |   mahabharat अध्याय 9.12: भीमसेन और शल्यका भयानक गदायुद्ध तथा युधिष्ठिरके साथ शल्यका युद्ध, दुर्योधनद्वारा चेकितानका और युधिष्ठिरद्वारा चन्द्रसेन एवं द्रुमसेनका वध, पुन: युधिष्ठिर और माद्रीपुत्रोंके साथ शल्यका युद्ध   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 12: भीमसेन और शल्यका भयानक गदायुद्ध तथा युधिष्ठिरके साथ शल्यका युद्ध, दुर्योधनद्वारा चेकितानका और युधिष्ठिरद्वारा चन्द्रसेन एवं द्रुमसेनका वध, पुन: युधिष्ठिर और माद्रीपुत्रोंके साथ शल्यका युद्ध  »  श्लोक 33-34h
 
 
श्लोक  9.12.33-34h 
तावकानामनीकेषु पाण्डवा जितकाशिन:॥ ३३॥
व्यचरन्त महाराज प्रेक्षणीया: समन्तत:।
 
 
अनुवाद
महाराज! विजय से प्रसन्न होकर पाण्डव आपकी सेना में निर्भय होकर विचरण करते थे। उस समय वे देखने योग्य थे।
 
Maharaj! The Pandavas, elated with victory, used to move fearlessly in your army. At that time they were worth seeing.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)