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mahabharat 9.12.30-31h: हे भरतश्रेष्ठ, आपके पुत्र ने तुरन्त ही प्रासक बाण चलाकर आक्रमणकारी पाण्डव योद्धा चेकितान की छाती पर गहरा घाव कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 9.12: भीमसेन और शल्यका भयानक गदायुद्ध तथा युधिष्ठिरके साथ शल्यका युद्ध, दुर्योधनद्वारा चेकितानका और युधिष्ठिरद्वारा चन्द्रसेन एवं द्रुमसेनका वध, पुन: युधिष्ठिर और माद्रीपुत्रोंके साथ शल्यका युद्ध   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 12: भीमसेन और शल्यका भयानक गदायुद्ध तथा युधिष्ठिरके साथ शल्यका युद्ध, दुर्योधनद्वारा चेकितानका और युधिष्ठिरद्वारा चन्द्रसेन एवं द्रुमसेनका वध, पुन: युधिष्ठिर और माद्रीपुत्रोंके साथ शल्यका युद्ध  »  श्लोक 30-31h
 
 
श्लोक  9.12.30-31h 
तेषामापततां तूर्णं पुत्रस्ते भरतर्षभ॥ ३०॥
प्रासेन चेकितानं वै विव्याध हृदये भृशम्।
 
 
अनुवाद
हे भरतश्रेष्ठ, आपके पुत्र ने तुरन्त ही प्रासक बाण चलाकर आक्रमणकारी पाण्डव योद्धा चेकितान की छाती पर गहरा घाव कर दिया।
 
O best of the Bharatas, your son immediately struck a prasaka and inflicted a deep wound on the chest of Chekitana, one of the attacking Pandava warriors.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)