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mahabharat 9.12.22: तत्पश्चात् वे पुनः अपनी भयंकर गदाएँ उठाकर दो शिखरों वाले पर्वतों के समान एक दूसरे पर प्रहार करने लगे और गोल-गोल घूमने लगे॥22॥   |   mahabharat अध्याय 9.12: भीमसेन और शल्यका भयानक गदायुद्ध तथा युधिष्ठिरके साथ शल्यका युद्ध, दुर्योधनद्वारा चेकितानका और युधिष्ठिरद्वारा चन्द्रसेन एवं द्रुमसेनका वध, पुन: युधिष्ठिर और माद्रीपुत्रोंके साथ शल्यका युद्ध   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 12: भीमसेन और शल्यका भयानक गदायुद्ध तथा युधिष्ठिरके साथ शल्यका युद्ध, दुर्योधनद्वारा चेकितानका और युधिष्ठिरद्वारा चन्द्रसेन एवं द्रुमसेनका वध, पुन: युधिष्ठिर और माद्रीपुत्रोंके साथ शल्यका युद्ध  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  9.12.22 
अथोद्यम्य गदे घोरे सशृङ्गाविव पर्वतौ।
तावाजघ्नतुरन्योन्यं मण्डलानि विचेरतु:॥ २२॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् वे पुनः अपनी भयंकर गदाएँ उठाकर दो शिखरों वाले पर्वतों के समान एक दूसरे पर प्रहार करने लगे और गोल-गोल घूमने लगे॥22॥
 
Thereafter, they again picked up their fierce maces and started striking each other like two peaked mountains and moving in a circular motion. 22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)