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mahabharat 9.12.17: इसी प्रकार भीमसेन की गदा के प्रहार से बार-बार चोट खाने पर भी शल्य को कोई पीड़ा नहीं हुई, जैसे हाथी के दाँत के प्रहार से विशाल पर्वत को कोई पीड़ा नहीं होती।   |   mahabharat अध्याय 9.12: भीमसेन और शल्यका भयानक गदायुद्ध तथा युधिष्ठिरके साथ शल्यका युद्ध, दुर्योधनद्वारा चेकितानका और युधिष्ठिरद्वारा चन्द्रसेन एवं द्रुमसेनका वध, पुन: युधिष्ठिर और माद्रीपुत्रोंके साथ शल्यका युद्ध   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 12: भीमसेन और शल्यका भयानक गदायुद्ध तथा युधिष्ठिरके साथ शल्यका युद्ध, दुर्योधनद्वारा चेकितानका और युधिष्ठिरद्वारा चन्द्रसेन एवं द्रुमसेनका वध, पुन: युधिष्ठिर और माद्रीपुत्रोंके साथ शल्यका युद्ध  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  9.12.17 
तथा भीमगदावेगैस्ताडॺमानो मुहुर्मुुहु:।
शल्यो न विव्यथे राजन् दन्तिनेव महागिरि:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
इसी प्रकार भीमसेन की गदा के प्रहार से बार-बार चोट खाने पर भी शल्य को कोई पीड़ा नहीं हुई, जैसे हाथी के दाँत के प्रहार से विशाल पर्वत को कोई पीड़ा नहीं होती।
 
Similarly, despite being repeatedly hit by the force of Bhimasena's mace, Shalya did not feel any pain, just as a great mountain is not hurt by the blow of the tusk of an elephant.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)