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mahabharat 9.12.16: मद्रराज की गदा से दाहिने-बाएँ भयंकर चोट लगने पर भी बलवान भीमसेन अविचलित रहे, वे पर्वत के समान स्थिर खड़े रहे॥16॥   |   mahabharat अध्याय 9.12: भीमसेन और शल्यका भयानक गदायुद्ध तथा युधिष्ठिरके साथ शल्यका युद्ध, दुर्योधनद्वारा चेकितानका और युधिष्ठिरद्वारा चन्द्रसेन एवं द्रुमसेनका वध, पुन: युधिष्ठिर और माद्रीपुत्रोंके साथ शल्यका युद्ध   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 12: भीमसेन और शल्यका भयानक गदायुद्ध तथा युधिष्ठिरके साथ शल्यका युद्ध, दुर्योधनद्वारा चेकितानका और युधिष्ठिरद्वारा चन्द्रसेन एवं द्रुमसेनका वध, पुन: युधिष्ठिर और माद्रीपुत्रोंके साथ शल्यका युद्ध  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  9.12.16 
गदया मद्रराजस्य सव्यदक्षिणमाहत:।
भीमसेनो महाबाहुर्न चचालाचलो तथा॥ १६॥
 
 
अनुवाद
मद्रराज की गदा से दाहिने-बाएँ भयंकर चोट लगने पर भी बलवान भीमसेन अविचलित रहे, वे पर्वत के समान स्थिर खड़े रहे॥16॥
 
Even after being hit hard on the right and left by the Madra king's mace, the powerful Bhimasena remained unperturbed. He stood as still as a mountain.॥16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)