Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 9.11.63: युद्ध में बिना किसी प्रयास के महान् कर्म करने वाले भीमसेन का महान पराक्रम देखकर कुन्ती के सभी पुत्र प्रसन्न हो गए और उनकी बहुत प्रशंसा करने लगे ॥63॥   |   mahabharat अध्याय 9.11: शल्यका पराक्रम, कौरव-पाण्डवयोद्धाओंके द्वन्द्वयुद्ध तथा भीमसेनके द्वारा शल्यकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 11: शल्यका पराक्रम, कौरव-पाण्डवयोद्धाओंके द्वन्द्वयुद्ध तथा भीमसेनके द्वारा शल्यकी पराजय  »  श्लोक 63
 
 
श्लोक  9.11.63 
तत: सुमनस: पार्था भीमसेनमपूजयन्।
ते दृष्ट्वा कर्म संग्रामे घोरमक्लिष्टकर्मण:॥ ६३॥
 
 
अनुवाद
युद्ध में बिना किसी प्रयास के महान् कर्म करने वाले भीमसेन का महान पराक्रम देखकर कुन्ती के सभी पुत्र प्रसन्न हो गए और उनकी बहुत प्रशंसा करने लगे ॥63॥
 
Seeing the great bravery of Bhimsen, who performed great deeds without any effort in the battle, all the sons of Kunti became happy and started praising him a lot. 63॥
 
इति श्रीमहाभारते शल्यपर्वणि भीमसेनशल्ययुद्धे एकादशोऽध्याय:॥ ११॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शल्यपर्वमें भीमसेन और शल्यका युद्धविषयक ग्यारहवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ११॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)