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mahabharat 9.11.51-52: उस पर स्वर्ण-पत्र जड़ा हुआ था। वह लोहे की बनी हुई गदा प्रज्वलित उल्का और कुहनी पर बैठी हुई सर्पिणी के समान अत्यन्त डरावनी लग रही थी। उसका सम्पूर्ण शरीर चर्बी और तेल से लिपटा हुआ था, मानो कोई प्रिय स्त्री अपने शरीर पर चंदन और अगुरु का लेप लगाए हुए हो। वह यमराज की जीभ के समान भयानक लग रही थी। 51-52   |   mahabharat अध्याय 9.11: शल्यका पराक्रम, कौरव-पाण्डवयोद्धाओंके द्वन्द्वयुद्ध तथा भीमसेनके द्वारा शल्यकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  9.11.51-52 
हेमपट्टपरिक्षिप्तामुल्कां प्रज्वलितामिव।
शैक्यां व्यालीमिवात्युग्रां वज्रकल्पामयोमयीम्॥ ५१॥
चन्दनागुरुपङ्काक्तां प्रमदामीप्सितामिव।
वसामेदोपदिग्धाङ्गीं जिह्वां वैवस्वतीमिव॥ ५२॥
 
 
अनुवाद
उस पर स्वर्ण-पत्र जड़ा हुआ था। वह लोहे की बनी हुई गदा प्रज्वलित उल्का और कुहनी पर बैठी हुई सर्पिणी के समान अत्यन्त डरावनी लग रही थी। उसका सम्पूर्ण शरीर चर्बी और तेल से लिपटा हुआ था, मानो कोई प्रिय स्त्री अपने शरीर पर चंदन और अगुरु का लेप लगाए हुए हो। वह यमराज की जीभ के समान भयानक लग रही थी। 51-52
 
Gold leaf was studded on it. That iron-made mace looked very scary like a blazing meteor and a female serpent sitting on a haunches. Her entire body was covered with fat and oil like a beloved lady with sandalwood and aguru paste applied on her body. She looked as scary as the tongue of Yamraj. 51-52.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)