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mahabharat 9.11.49-50: यह देखकर वीर भीमसेन ने क्रोधित होकर अपने होंठ दांतों से काट लिये और युद्धस्थल में शल्य का नाश करने का संकल्प करके यमराज की गदा के समान भयंकर गदा से उन पर आक्रमण किया। हाथी, घोड़े और मनुष्यों तक के शरीरों को नष्ट करने वाली वह गदा विनाश के लिये तैयार मृत्यु की रात्रि के समान प्रतीत हो रही थी।   |   mahabharat अध्याय 9.11: शल्यका पराक्रम, कौरव-पाण्डवयोद्धाओंके द्वन्द्वयुद्ध तथा भीमसेनके द्वारा शल्यकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  9.11.49-50 
तस्य भीमो रणे क्रुद्ध: संदश्य दशनच्छदम्।
विनाशायाभिसंधाय गदामादाय वीर्यवान्॥ ४९॥
यमदण्डप्रतीकाशां कालरात्रिमिवोद्यताम्।
गजवाजिमनुष्याणां देहान्तकरणीमपि॥ ५०॥
 
 
अनुवाद
यह देखकर वीर भीमसेन ने क्रोधित होकर अपने होंठ दांतों से काट लिये और युद्धस्थल में शल्य का नाश करने का संकल्प करके यमराज की गदा के समान भयंकर गदा से उन पर आक्रमण किया। हाथी, घोड़े और मनुष्यों तक के शरीरों को नष्ट करने वाली वह गदा विनाश के लिये तैयार मृत्यु की रात्रि के समान प्रतीत हो रही थी।
 
Seeing this, the valiant Bhimasena became angry and bit his lips and with the resolve to destroy Shalya on the battlefield, attacked him with a mace as fierce as the mace of Yama. That mace, which destroyed the bodies of elephants, horses and even humans, looked like the night of death ready for destruction.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)