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mahabharat 9.11.48: महाराज! इधर शल्य भी अत्यन्त क्रोधित होकर सोमकों तथा पाण्डव योद्धाओं का संहार करने लगे। उन्होंने पुनः तीखे बाणों से युधिष्ठिर को पीड़ा पहुँचानी आरम्भ कर दी।   |   mahabharat अध्याय 9.11: शल्यका पराक्रम, कौरव-पाण्डवयोद्धाओंके द्वन्द्वयुद्ध तथा भीमसेनके द्वारा शल्यकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  9.11.48 
शल्योऽपि राजन् संक्रुद्धो निघ्नन् सोमकपाण्डवान्।
पुनरेव शितैर्बाणैर्युधिष्ठिरमपीडयत्॥ ४८॥
 
 
अनुवाद
महाराज! इधर शल्य भी अत्यन्त क्रोधित होकर सोमकों तथा पाण्डव योद्धाओं का संहार करने लगे। उन्होंने पुनः तीखे बाणों से युधिष्ठिर को पीड़ा पहुँचानी आरम्भ कर दी।
 
King! Here Shalya too became very angry and started killing the Somakas and Pandava warriors. He again started tormenting Yudhishthira with sharp arrows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)