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mahabharat 9.11.41-42h: कृतवर्मा ने युद्धभूमि में भीमसेन के भालू जैसे रंग के घोड़ों को मार डाला। घोड़ों के मारे जाने पर पाण्डवपुत्र भीमसेन रथ से उतरकर हाथ में गदा लेकर युद्ध करने लगे, मानो यमराज अपनी छड़ी से प्रहार कर रहे हों।   |   mahabharat अध्याय 9.11: शल्यका पराक्रम, कौरव-पाण्डवयोद्धाओंके द्वन्द्वयुद्ध तथा भीमसेनके द्वारा शल्यकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  9.11.41-42h 
ऋक्षवर्णाञ्जघानाश्वान् भोजो भीमस्य संयुगे।
सोऽवतीर्य रथोपस्थाद्धताश्वात् पाण्डुनन्दन:॥ ४१॥
कालो दण्डमिवोद्यम्य गदापाणिरयुध्यत।
 
 
अनुवाद
कृतवर्मा ने युद्धभूमि में भीमसेन के भालू जैसे रंग के घोड़ों को मार डाला। घोड़ों के मारे जाने पर पाण्डवपुत्र भीमसेन रथ से उतरकर हाथ में गदा लेकर युद्ध करने लगे, मानो यमराज अपनी छड़ी से प्रहार कर रहे हों।
 
Kritavarman killed Bhimasena's bear-coloured horses on the battlefield. After the horses were killed, Pandava's son Bhimasena got down from the chariot and started fighting with a mace in his hand, as if Yamaraja was attacking with his stick. 41 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)