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mahabharat 9.11.34-36: महाराज! जैसे बादल पर्वत पर जल बरसाते हैं, उसी प्रकार वे शल्य पर बाणों की वर्षा कर रहे थे। कुन्तीपुत्रों द्वारा शल्य को सब ओर से अवरुद्ध देखकर कृतवर्मा और कृपाचार्य क्रोधित होकर उनकी ओर दौड़े। उनके साथ पराक्रमी उलूक, सुबलपुत्र शकुनि, महाबली अश्वत्थामा तथा आपके सभी पुत्र भी धीरे-धीरे वहाँ आकर युद्धस्थल में शल्य की रक्षा करने लगे। 34-36।   |   mahabharat अध्याय 9.11: शल्यका पराक्रम, कौरव-पाण्डवयोद्धाओंके द्वन्द्वयुद्ध तथा भीमसेनके द्वारा शल्यकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  9.11.34-36 
अभ्यवर्षन् महाराज मेघा इव महीधरम्।
ततो दृष्ट्वा वार्यमाणं शल्यं पार्थै: समन्तत:॥ ३४॥
कृतवर्मा कृपश्चैव संक्रुद्धावभ्यधावताम्।
उलूकश्च महावीर्य: शकुनिश्चापि सौबल:॥ ३५॥
समागम्याथ शनकैरश्वत्थामा महाबल:।
तव पुत्राश्च कात्‍स्‍न्‍‍‍र्येन जुगुपु: शल्यमाहवे॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
महाराज! जैसे बादल पर्वत पर जल बरसाते हैं, उसी प्रकार वे शल्य पर बाणों की वर्षा कर रहे थे। कुन्तीपुत्रों द्वारा शल्य को सब ओर से अवरुद्ध देखकर कृतवर्मा और कृपाचार्य क्रोधित होकर उनकी ओर दौड़े। उनके साथ पराक्रमी उलूक, सुबलपुत्र शकुनि, महाबली अश्वत्थामा तथा आपके सभी पुत्र भी धीरे-धीरे वहाँ आकर युद्धस्थल में शल्य की रक्षा करने लगे। 34-36।
 
Maharaj! Just as the clouds pour water on the mountain, in the same way they were showering arrows on Shalya. Seeing Shalya blocked from all sides by Kunti's sons, Kritavarma and Kripacharya ran towards him in anger. Along with them, the mighty Ulook, Subala's son Shakuni, the mighty Ashwatthama and all your sons also slowly came there and started protecting Shalya on the battlefield. 34-36.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)