Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 9.11.30-31h: तदनन्तर राजा युधिष्ठिर ने क्रोध में भरकर अपने पैदल सैनिकों और घुड़सवारों के साथ शल्य को अपने तीखे बाणों से रोक दिया, जैसे महावत अपने अंकुशों से विशाल हाथी को आगे बढ़ने से रोक देता है। | mahabharat अध्याय 9.11: शल्यका पराक्रम, कौरव-पाण्डवयोद्धाओंके द्वन्द्वयुद्ध तथा भीमसेनके द्वारा शल्यकी पराजय । mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तमापतन्तं पत्त्यश्वै: क्रुद्धो राजा युधिष्ठिर:॥ ३०॥
अवारयच्छरैस्तीक्ष्णैर्महाद्विपमिवाङ्कुशै:।
अनुवाद
तदनन्तर राजा युधिष्ठिर ने क्रोध में भरकर अपने पैदल सैनिकों और घुड़सवारों के साथ शल्य को अपने तीखे बाणों से रोक दिया, जैसे महावत अपने अंकुशों से विशाल हाथी को आगे बढ़ने से रोक देता है।
Then King Yudhishthira, filled with anger, accompanied by his infantry and horsemen, stopped Shalya with his sharp arrows, just as a mahout stops a huge elephant from moving forward with his goads.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥