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mahabharat 9.11.21-23: महाबली शल्य ने भीमसेन, द्रौपदी के समस्त पुत्र, माद्रिकाकुमार नकुल, सहदेव, धृष्टद्युम्न, सात्यकि और शिखण्डी को शिला पर तीखे हुए सुवर्णमय पंखयुक्त दस-दस बाणों से घायल कर दिया। तत्पश्चात् वे वर्षाकाल में जल बरसाने वाले इन्द्र के समान बाणों की वर्षा करने लगे। 21-23॥   |   mahabharat अध्याय 9.11: शल्यका पराक्रम, कौरव-पाण्डवयोद्धाओंके द्वन्द्वयुद्ध तथा भीमसेनके द्वारा शल्यकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  9.11.21-23 
भीमसेनं शरैश्चापि रुक्मपुङ्खै: शिलाशितै:॥ २१॥
द्रौपदेयांस्तथा सर्वान् माद्रीपुत्रौ च पाण्डवौ।
धृष्टद्युम्नं च शैनेयं शिखण्डिनमथापि च॥ २२॥
एकैकं दशभिर्बाणैर्विव्याध स महाबल:।
ततोऽसृजद् बाणवर्षं घर्मान्ते मघवानिव॥ २३॥
 
 
अनुवाद
महाबली शल्य ने भीमसेन, द्रौपदी के समस्त पुत्र, माद्रिकाकुमार नकुल, सहदेव, धृष्टद्युम्न, सात्यकि और शिखण्डी को शिला पर तीखे हुए सुवर्णमय पंखयुक्त दस-दस बाणों से घायल कर दिया। तत्पश्चात् वे वर्षाकाल में जल बरसाने वाले इन्द्र के समान बाणों की वर्षा करने लगे। 21-23॥
 
The mighty Shalya injured Bhimasena, all the sons of Draupadi, Madrika Kumar Nakul, Sahadeva, Dhrishtadyumna, Satyaki and Shikhandi, each of them with ten arrows with golden feathers sharpened on a rock. After that, he started raining arrows like Indra who rains water during the rainy season. 21-23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)