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mahabharat 9.11.20-21h: धर्मात्मा राजा शल्य ने वर्षा करने वाले इन्द्र के समान कुन्तीपुत्र युधिष्ठिर पर बाणों की वर्षा आरम्भ कर दी।   |   mahabharat अध्याय 9.11: शल्यका पराक्रम, कौरव-पाण्डवयोद्धाओंके द्वन्द्वयुद्ध तथा भीमसेनके द्वारा शल्यकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  9.11.20-21h 
शल्यस्तु शरवर्षेण वर्षन्निव सहस्रदृक्॥ २०॥
अभ्यवर्षत धर्मात्मा कुन्तीपुत्रं युधिष्ठिरम्।
 
 
अनुवाद
धर्मात्मा राजा शल्य ने वर्षा करने वाले इन्द्र के समान कुन्तीपुत्र युधिष्ठिर पर बाणों की वर्षा आरम्भ कर दी।
 
The righteous king Shalya, like Indra the rainmaker, started showering arrows on Kunti's son Yudhishthir.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)