Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 9.11.15: आकाश से बहुत-सी उल्काएँ सूर्यमण्डल से टकराकर पृथ्वी पर गिरने लगीं। उनके साथ छड़ों सहित भाले भी गिर रहे थे। उन उल्काओं के अग्रभाग उनके प्रकाश से चमक रहे थे। वे सब-की-सब चारों ओर बिखर रही थीं॥15॥ | mahabharat अध्याय 9.11: शल्यका पराक्रम, कौरव-पाण्डवयोद्धाओंके द्वन्द्वयुद्ध तथा भीमसेनके द्वारा शल्यकी पराजय । mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
आकाश से बहुत-सी उल्काएँ सूर्यमण्डल से टकराकर पृथ्वी पर गिरने लगीं। उनके साथ छड़ों सहित भाले भी गिर रहे थे। उन उल्काओं के अग्रभाग उनके प्रकाश से चमक रहे थे। वे सब-की-सब चारों ओर बिखर रही थीं॥15॥
Many meteors from the sky collided with the solar system and started falling on the earth. Along with them were falling spears with rods. The front parts of those meteors were shining with their light. All of them were getting scattered all around.॥ 15॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥