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mahabharat 9.11.1-6: संजय कहते हैं—हे राजन! उस महायुद्ध में जब दोनों पक्षों की सेनाएँ एक-दूसरे पर आक्रमण करके भयभीत हो गईं, दोनों पक्षों के योद्धा भागने लगे, हाथी चिंघाड़ने लगे और पैदल सैनिक कराहने और चीखने लगे; बहुत से घोड़े मारे गए, समस्त प्राणियों का भयानक और विनाशकारी संहार होने लगा, नाना प्रकार के अस्त्र-शस्त्र आपस में टकराने लगे, रथ और हाथी आपस में उलझ गए, युद्ध करने वाले कुशल योद्धाओं का हर्ष और कायरों का भय बढ़ाने वाला युद्ध होने लगा, दोनों पक्षों के योद्धा एक-दूसरे को मारने की इच्छा से दोनों पक्षों की सेनाओं में घुसने लगे, प्राणों की बाजी लगाकर अत्यन्त भयानक युद्ध का जुआ खेलने लगे और यमराज का राज्य बढ़ाने वाला घोर संग्राम होने लगा, उस समय पाण्डव अपने तीखे बाणों से आपकी सेना का संहार करने लगे। उसी प्रकार आपके योद्धा भी पाण्डव सैनिकों का संहार करने लगे॥1-6॥   |   mahabharat अध्याय 9.11: शल्यका पराक्रम, कौरव-पाण्डवयोद्धाओंके द्वन्द्वयुद्ध तथा भीमसेनके द्वारा शल्यकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 11: शल्यका पराक्रम, कौरव-पाण्डवयोद्धाओंके द्वन्द्वयुद्ध तथा भीमसेनके द्वारा शल्यकी पराजय  »  श्लोक 1-6
 
 
श्लोक  9.11.1-6 
संजय उवाच
तस्मिन् विलुलिते सैन्ये वध्यमाने परस्परम्।
द्रवमाणेषु योधेषु विनदत्सु च दन्तिषु॥ १॥
कूजतां स्तनतां चैव पदातीनां महाहवे।
निहतेषु महाराज हयेषु बहुधा तदा॥ २॥
प्रक्षये दारुणे घोरे संहारे सर्वदेहिनाम्।
नानाशस्त्रसमावाये व्यतिषक्तरथद्विपे॥ ३॥
हर्षणे युद्धशौण्डानां भीरूणां भयवर्धने।
गाहमानेषु योधेषु परस्परवधैषिषु॥ ४॥
प्राणादाने महाघोरे वर्तमाने दुरोदरे।
संग्रामे घोररूपे तु यमराष्ट्रविवर्धने॥ ५॥
पाण्डवास्तावकं सैन्यं व्यधमन्निशितै: शरै:।
तथैव तावका योधा जघ्नु: पाण्डवसैनिकान्॥ ६॥
 
 
अनुवाद
संजय कहते हैं—हे राजन! उस महायुद्ध में जब दोनों पक्षों की सेनाएँ एक-दूसरे पर आक्रमण करके भयभीत हो गईं, दोनों पक्षों के योद्धा भागने लगे, हाथी चिंघाड़ने लगे और पैदल सैनिक कराहने और चीखने लगे; बहुत से घोड़े मारे गए, समस्त प्राणियों का भयानक और विनाशकारी संहार होने लगा, नाना प्रकार के अस्त्र-शस्त्र आपस में टकराने लगे, रथ और हाथी आपस में उलझ गए, युद्ध करने वाले कुशल योद्धाओं का हर्ष और कायरों का भय बढ़ाने वाला युद्ध होने लगा, दोनों पक्षों के योद्धा एक-दूसरे को मारने की इच्छा से दोनों पक्षों की सेनाओं में घुसने लगे, प्राणों की बाजी लगाकर अत्यन्त भयानक युद्ध का जुआ खेलने लगे और यमराज का राज्य बढ़ाने वाला घोर संग्राम होने लगा, उस समय पाण्डव अपने तीखे बाणों से आपकी सेना का संहार करने लगे। उसी प्रकार आपके योद्धा भी पाण्डव सैनिकों का संहार करने लगे॥1-6॥
 
Sanjaya says—O King! In that great war, when the armies of both sides were frightened after being attacked by each other, the warriors of both the sides started fleeing, the elephants started trumpeting and the foot soldiers started groaning and screaming; many horses were killed, a terrible and destructive massacre of all living beings started, various types of weapons started clashing with each other, chariots and elephants got entangled with each other, a battle started which increased the joy of the skilled warriors and the fear of the cowards, the warriors of both the sides started entering the armies of both the sides with the desire to kill each other, the gambling of a very dreadful war started by putting their lives at stake and a fierce battle started which increased the kingdom of Yamaraja, at that time the Pandavas started killing your army with their sharp arrows. In the same way, your warriors also started killing the Pandava soldiers.॥1-6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)