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mahabharat 9.10.67-68h: जैसे वर्षा ऋतु में दो नदियाँ एक-दूसरे के जल से भर जाने पर व्याकुल हो जाती हैं, उसी प्रकार वे दोनों सेनाएँ आपस में लड़कर अत्यन्त व्याकुल हो उठीं।   |   mahabharat अध्याय 9.10: नकुलद्वारा कर्णके तीन पुत्रोंका वध तथा उभयपक्षकी सेनाओंका भयानक युद्ध   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 10: नकुलद्वारा कर्णके तीन पुत्रोंका वध तथा उभयपक्षकी सेनाओंका भयानक युद्ध  »  श्लोक 67-68h
 
 
श्लोक  9.10.67-68h 
ते सेने भृशसंतप्ते वध्यमाने परस्परम्॥ ६७॥
व्याकुले समपद्येतां वर्षासु सरिताविव।
 
 
अनुवाद
जैसे वर्षा ऋतु में दो नदियाँ एक-दूसरे के जल से भर जाने पर व्याकुल हो जाती हैं, उसी प्रकार वे दोनों सेनाएँ आपस में लड़कर अत्यन्त व्याकुल हो उठीं।
 
Just as two rivers become agitated during the rainy season when they are filled with each other's water, similarly those two armies became extremely agitated after fighting each other. 67 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)