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mahabharat 9.10.48: महाराज ! तत्पश्चात् शत्रु योद्धाओं का संहार करने वाले पराक्रमी नकुल ने क्रोधित होकर बाणों की वर्षा से सुषेण की सम्पूर्ण दिशाओं को आच्छादित कर दिया ॥48॥   |   mahabharat अध्याय 9.10: नकुलद्वारा कर्णके तीन पुत्रोंका वध तथा उभयपक्षकी सेनाओंका भयानक युद्ध   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 10: नकुलद्वारा कर्णके तीन पुत्रोंका वध तथा उभयपक्षकी सेनाओंका भयानक युद्ध  »  श्लोक 48
 
 
श्लोक  9.10.48 
तत: क्रुद्धो महाराज नकुल: परवीरहा।
शरैस्तस्य दिश: सर्वाश्छादयामास वीर्यवान्॥ ४८॥
 
 
अनुवाद
महाराज ! तत्पश्चात् शत्रु योद्धाओं का संहार करने वाले पराक्रमी नकुल ने क्रोधित होकर बाणों की वर्षा से सुषेण की सम्पूर्ण दिशाओं को आच्छादित कर दिया ॥48॥
 
Maharaj! After that, the mighty Nakula, who killed the enemy warriors, got angry and covered all the directions of Sushen with a shower of arrows. 48॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)