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mahabharat 9.10.45-46: वह दूसरा धनुष हाथ में लेकर सुषेण से युद्ध करने लगा। वे दोनों महारथी योद्धा बाणों की वर्षा करते हुए एक-दूसरे पर टूट पड़े और एक-दूसरे को मार डालने का प्रयत्न करने लगे।   |   mahabharat अध्याय 9.10: नकुलद्वारा कर्णके तीन पुत्रोंका वध तथा उभयपक्षकी सेनाओंका भयानक युद्ध   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 10: नकुलद्वारा कर्णके तीन पुत्रोंका वध तथा उभयपक्षकी सेनाओंका भयानक युद्ध  »  श्लोक 45-46
 
 
श्लोक  9.10.45-46 
अन्यत् कार्मुकमादाय सुषेणं समयोधयत्॥ ४५॥
तावुभौ शरवर्षाभ्यां समासाद्य परस्परम्।
परस्परवधे यत्नं चक्रतु: सुमहारथौ॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
वह दूसरा धनुष हाथ में लेकर सुषेण से युद्ध करने लगा। वे दोनों महारथी योद्धा बाणों की वर्षा करते हुए एक-दूसरे पर टूट पड़े और एक-दूसरे को मार डालने का प्रयत्न करने लगे।
 
He took the second bow in his hand and began to fight with Sushen. Both those mighty warriors clashed with each other with a shower of arrows and tried to kill each other.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)