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mahabharat 9.10.34-35h: तब सत्यसेन ने दूसरा भारी धनुष उठाया, जो शत्रुओं के वेग को नष्ट करने में समर्थ था, और अपने बाणों से पाण्डुपुत्र नकुल को आच्छादित कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 9.10: नकुलद्वारा कर्णके तीन पुत्रोंका वध तथा उभयपक्षकी सेनाओंका भयानक युद्ध   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 10: नकुलद्वारा कर्णके तीन पुत्रोंका वध तथा उभयपक्षकी सेनाओंका भयानक युद्ध  »  श्लोक 34-35h
 
 
श्लोक  9.10.34-35h 
अथान्यद् धनुरादाय वेगघ्नं भारसाधनम्॥ ३४॥
शरै: संछादयामास समन्तात् पाण्डुनन्दनम्।
 
 
अनुवाद
तब सत्यसेन ने दूसरा भारी धनुष उठाया, जो शत्रुओं के वेग को नष्ट करने में समर्थ था, और अपने बाणों से पाण्डुपुत्र नकुल को आच्छादित कर दिया।
 
Then Satyasena took up another heavy bow, which was capable of destroying the enemy's speed, and covered Pandu's son Nakula with his arrows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)