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mahabharat 9.10.32-33h: तब नकुल क्रोधित हो उठे और उन्होंने दूसरा धनुष लेकर पांच बाणों से सुषेण को घायल कर दिया और एक बाण से उसकी ध्वजा काट डाली।   |   mahabharat अध्याय 9.10: नकुलद्वारा कर्णके तीन पुत्रोंका वध तथा उभयपक्षकी सेनाओंका भयानक युद्ध   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 10: नकुलद्वारा कर्णके तीन पुत्रोंका वध तथा उभयपक्षकी सेनाओंका भयानक युद्ध  »  श्लोक 32-33h
 
 
श्लोक  9.10.32-33h 
अथान्यद् धनुरादाय नकुल: क्रोधमूर्च्छित:॥ ३२॥
सुषेणं पञ्चभिर्विद्‍ध्वा ध्वजमेकेन चिच्छिदे।
 
 
अनुवाद
तब नकुल क्रोधित हो उठे और उन्होंने दूसरा धनुष लेकर पांच बाणों से सुषेण को घायल कर दिया और एक बाण से उसकी ध्वजा काट डाली।
 
Then Nakula became furious and taking another bow he wounded Sushen with five arrows and cut off his flag with one of them.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)