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श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 10: नकुलद्वारा कर्णके तीन पुत्रोंका वध तथा उभयपक्षकी सेनाओंका भयानक युद्ध  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  9.10.3 
अत्र मां प्रापय क्षिप्रं पश्य मे सारथे बलम्।
न समर्थो हि मे पार्थ: स्थातुमद्य पुरो युधि॥ ३॥
 
 
अनुवाद
सारथी! मुझे शीघ्र ही उनके पास ले चलो। फिर मेरा पराक्रम देखो। आज युद्ध में कुंतीपुत्र युधिष्ठिर मेरे सामने कभी नहीं टिक सकेंगे।'
 
Charioteer! Take me to them quickly. Then see my strength. Today, Kunti's son Yudhishthira can never stand before me in the war.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)