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mahabharat 9.10.28-29h: राजेन्द्र! तत्पश्चात् पाण्डुपुत्र नकुल ने तीखे घोड़े पर सवार होकर सुवर्णमय पंखों वाला एक नाराच ढूँढ़ निकाला और सत्यसेन का धनुष काट डाला ॥28 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 9.10: नकुलद्वारा कर्णके तीन पुत्रोंका वध तथा उभयपक्षकी सेनाओंका भयानक युद्ध   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 10: नकुलद्वारा कर्णके तीन पुत्रोंका वध तथा उभयपक्षकी सेनाओंका भयानक युद्ध  »  श्लोक 28-29h
 
 
श्लोक  9.10.28-29h 
तत: संधाय नाराचं रुक्मपुङ्खं शिलाशितम्॥ २८॥
धनुश्चिच्छेद राजेन्द्र सत्यसेनस्य पाण्डव:।
 
 
अनुवाद
राजेन्द्र! तत्पश्चात् पाण्डुपुत्र नकुल ने तीखे घोड़े पर सवार होकर सुवर्णमय पंखों वाला एक नाराच ढूँढ़ निकाला और सत्यसेन का धनुष काट डाला ॥28 1/2॥
 
Rajendra! After that, Nakula, the son of Pandu, having found a Narach which had golden wings and had been mounted on a sharpened horse, cut off Satyasena's bow. 28 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)