Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 9.10.11-12h: उस समय मुझे पाण्डुपुत्र नकुल और कर्णपुत्र चित्रसेन में कोई अंतर नज़र नहीं आ रहा था। दोनों ही अस्त्र-शस्त्रों में निपुण, बलवान और रथ-संग्राम में कुशल थे। दोनों ही वीर एक-दूसरे पर आक्रमण करने में लगे हुए थे और एक-दूसरे के छिद्र (आक्रमण के अवसर) ढूँढ़ रहे थे। | mahabharat अध्याय 9.10: नकुलद्वारा कर्णके तीन पुत्रोंका वध तथा उभयपक्षकी सेनाओंका भयानक युद्ध । mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उस समय मुझे पाण्डुपुत्र नकुल और कर्णपुत्र चित्रसेन में कोई अंतर नज़र नहीं आ रहा था। दोनों ही अस्त्र-शस्त्रों में निपुण, बलवान और रथ-संग्राम में कुशल थे। दोनों ही वीर एक-दूसरे पर आक्रमण करने में लगे हुए थे और एक-दूसरे के छिद्र (आक्रमण के अवसर) ढूँढ़ रहे थे।
At that time, I could not see any difference between Pandu's son Nakul and Karna's son Chitrasen. Both were experts in weapons, strong and skilled in chariot fighting. Both the brave men were engaged in attacking each other and were looking for each other's holes (opportunities to attack).
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥