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mahabharat 9.1.52-53h: हे भरतश्रेष्ठ! उनके ऐसा कहते सुनकर विदुरजी बार-बार काँपने लगे और धीरे-धीरे उन सब स्त्रियों को विदा कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 9.1: संजयके मुखसे शल्य और दुर्योधनके वधका वृत्तान्त सुनकर राजा धृतराष्ट्रका मूर्च्छित होना और सचेत होनेपर उन्हें विदुरका आश्वासन देना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 1: संजयके मुखसे शल्य और दुर्योधनके वधका वृत्तान्त सुनकर राजा धृतराष्ट्रका मूर्च्छित होना और सचेत होनेपर उन्हें विदुरका आश्वासन देना  »  श्लोक 52-53h
 
 
श्लोक  9.1.52-53h 
एवमुक्तस्तत: क्षत्ता ता: स्त्रियो भरतर्षभ॥ ५२॥
विसर्जयामास शनैर्वेपमान: पुन: पुन:।
 
 
अनुवाद
हे भरतश्रेष्ठ! उनके ऐसा कहते सुनकर विदुरजी बार-बार काँपने लगे और धीरे-धीरे उन सब स्त्रियों को विदा कर दिया।
 
O best of the Bharatas! On hearing him say this, Vidurji trembled repeatedly and slowly sent all those women away.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)