Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 9.1.5: हे कर्ण! हे कर्ण!’ ऐसा बार-बार कहते हुए वह शोक से व्याकुल हो गया और बड़ी कठिनाई से बचे हुए राजाओं के साथ अपने शिविर में लौट आया। | mahabharat अध्याय 9.1: संजयके मुखसे शल्य और दुर्योधनके वधका वृत्तान्त सुनकर राजा धृतराष्ट्रका मूर्च्छित होना और सचेत होनेपर उन्हें विदुरका आश्वासन देना । mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हा कर्ण हा कर्ण इति शोचमान: पुन: पुन:।
कृच्छ्रात् स्वशिबिरं प्राप्तो हतशेषैर्नृपै: सह॥ ५॥
अनुवाद
हे कर्ण! हे कर्ण!’ ऐसा बार-बार कहते हुए वह शोक से व्याकुल हो गया और बड़ी कठिनाई से बचे हुए राजाओं के साथ अपने शिविर में लौट आया।
Oh Karna! Oh Karna!' Saying this repeatedly, he became grief-stricken and with great difficulty returned to his camp along with the kings who had survived.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥