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mahabharat 9.1.49: प्रजानाथ! उस समय वह घड़े में रखे हुए साँप के समान गहरी साँसें लेने लगा। राजा को इतना चिंतित देखकर संजय भी वहाँ रोने लगा। 49।   |   mahabharat अध्याय 9.1: संजयके मुखसे शल्य और दुर्योधनके वधका वृत्तान्त सुनकर राजा धृतराष्ट्रका मूर्च्छित होना और सचेत होनेपर उन्हें विदुरका आश्वासन देना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 1: संजयके मुखसे शल्य और दुर्योधनके वधका वृत्तान्त सुनकर राजा धृतराष्ट्रका मूर्च्छित होना और सचेत होनेपर उन्हें विदुरका आश्वासन देना  »  श्लोक 49
 
 
श्लोक  9.1.49 
नि:श्वसन् जिह्मग इव कुम्भक्षिप्तो विशाम्पते।
संजयोऽप्यरुदत् तत्र दृष्ट्वा राजानमातुरम्॥ ४९॥
 
 
अनुवाद
प्रजानाथ! उस समय वह घड़े में रखे हुए साँप के समान गहरी साँसें लेने लगा। राजा को इतना चिंतित देखकर संजय भी वहाँ रोने लगा। 49।
 
Prajanath! At that time he started taking deep breaths like a snake kept in a pot. Seeing the king so anxious, Sanjaya also started crying there. 49.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)