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mahabharat 9.1.41-43h: हे राजनश्रेष्ठ! उन कठोर वचनों को सुनकर कुरुवंश की समस्त स्त्रियाँ और देवी गांधारी सहसा भूमि पर गिर पड़ीं। राजपरिवार के सभी सदस्य मूर्च्छित होकर भूमि पर गिर पड़े और विलाप करने लगे। वे ऐसे प्रतीत हो रहे थे मानो किसी विशाल कैनवास पर चित्रित चित्र हों।   |   mahabharat अध्याय 9.1: संजयके मुखसे शल्य और दुर्योधनके वधका वृत्तान्त सुनकर राजा धृतराष्ट्रका मूर्च्छित होना और सचेत होनेपर उन्हें विदुरका आश्वासन देना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 1: संजयके मुखसे शल्य और दुर्योधनके वधका वृत्तान्त सुनकर राजा धृतराष्ट्रका मूर्च्छित होना और सचेत होनेपर उन्हें विदुरका आश्वासन देना  »  श्लोक 41-43h
 
 
श्लोक  9.1.41-43h 
गान्धारी च नृपश्रेष्ठ सर्वाश्च कुरुयोषित:॥ ४१॥
पतिता: सहसा भूमौ श्रुत्वा क्रूरं वचस्तदा।
नि:संज्ञं पतितं भूमौ तदासीद् राजमण्डलम्॥ ४२॥
प्रलापयुक्तं महति चित्रन्यस्तं पटे यथा।
 
 
अनुवाद
हे राजनश्रेष्ठ! उन कठोर वचनों को सुनकर कुरुवंश की समस्त स्त्रियाँ और देवी गांधारी सहसा भूमि पर गिर पड़ीं। राजपरिवार के सभी सदस्य मूर्च्छित होकर भूमि पर गिर पड़े और विलाप करने लगे। वे ऐसे प्रतीत हो रहे थे मानो किसी विशाल कैनवास पर चित्रित चित्र हों।
 
O best of kings! On hearing those cruel words, all the women of the Kuru clan and Goddess Gandhari suddenly fell on the ground. All the members of the royal family lost their senses and fell on the ground and started wailing. They looked as if they were pictures painted on a huge canvas.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)