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mahabharat 9.1.4: वैशम्पायन जी बोले: हे राजन! कर्ण की मृत्यु के बाद धृतराष्ट्रपुत्र राजा दुर्योधन शोक के समुद्र में डूब गया और सब प्रकार से निराश हो गया।   |   mahabharat अध्याय 9.1: संजयके मुखसे शल्य और दुर्योधनके वधका वृत्तान्त सुनकर राजा धृतराष्ट्रका मूर्च्छित होना और सचेत होनेपर उन्हें विदुरका आश्वासन देना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 1: संजयके मुखसे शल्य और दुर्योधनके वधका वृत्तान्त सुनकर राजा धृतराष्ट्रका मूर्च्छित होना और सचेत होनेपर उन्हें विदुरका आश्वासन देना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  9.1.4 
वैशम्पायन उवाच
तत: कर्णे हते राजन् धार्तराष्ट्र: सुयोधन:।
भृशं शोकार्णवे मग्नो निराश: सर्वतोऽभवत्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायन जी बोले: हे राजन! कर्ण की मृत्यु के बाद धृतराष्ट्रपुत्र राजा दुर्योधन शोक के समुद्र में डूब गया और सब प्रकार से निराश हो गया।
 
Vaishmpayana said: O King! After the death of Karna, King Duryodhana, son of Dhritarashtra, was drowned in a sea of ​​grief and was disheartened on all counts.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)