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mahabharat 9.1.39-40h: वैशम्पायनजी कहते हैं: जनमेजय! ये कठोर वचन सुनकर राजाओं के राजा धृतराष्ट्र प्राणहीन होकर भूमि पर गिर पड़े।   |   mahabharat अध्याय 9.1: संजयके मुखसे शल्य और दुर्योधनके वधका वृत्तान्त सुनकर राजा धृतराष्ट्रका मूर्च्छित होना और सचेत होनेपर उन्हें विदुरका आश्वासन देना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 1: संजयके मुखसे शल्य और दुर्योधनके वधका वृत्तान्त सुनकर राजा धृतराष्ट्रका मूर्च्छित होना और सचेत होनेपर उन्हें विदुरका आश्वासन देना  »  श्लोक 39-40h
 
 
श्लोक  9.1.39-40h 
वैशम्पायन उवाच
एतच्छ्रुत्वा वच: क्रूरं धृतराष्ट्रो जनेश्वर:॥ ३९॥
निपपात स राजेन्द्रो गतसत्त्वो महीतले।
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं: जनमेजय! ये कठोर वचन सुनकर राजाओं के राजा धृतराष्ट्र प्राणहीन होकर भूमि पर गिर पड़े।
 
Vaishmpayana says: Janamejaya! On hearing these cruel words, the King of kings, Dhritarashtra, fell lifeless on the ground.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)