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mahabharat 9.1.37-38h: हे राजन! हे राजन! दोनों ओर से जो अक्षौहिणी सेनाएँ एकत्र हुई थीं, उनमें से केवल ये ही रथी बचे हैं, अन्य सभी मारे गए हैं।   |   mahabharat अध्याय 9.1: संजयके मुखसे शल्य और दुर्योधनके वधका वृत्तान्त सुनकर राजा धृतराष्ट्रका मूर्च्छित होना और सचेत होनेपर उन्हें विदुरका आश्वासन देना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 1: संजयके मुखसे शल्य और दुर्योधनके वधका वृत्तान्त सुनकर राजा धृतराष्ट्रका मूर्च्छित होना और सचेत होनेपर उन्हें विदुरका आश्वासन देना  »  श्लोक 37-38h
 
 
श्लोक  9.1.37-38h 
तथाप्येते महाराज रथिनो नृपसत्तम।
अक्षौहिणीनां सर्वासां समेतानां जनेश्वर॥ ३७॥
एते शेषा महाराज सर्वेऽन्ये निधनं गता:।
 
 
अनुवाद
हे राजन! हे राजन! दोनों ओर से जो अक्षौहिणी सेनाएँ एकत्र हुई थीं, उनमें से केवल ये ही रथी बचे हैं, अन्य सभी मारे गए हैं।
 
O best of kings! O king! Out of all the Akshauhini armies that had gathered on both sides, only these charioteers have survived; all the others have been killed.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)