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mahabharat 9.1.36: उधर पाँचों पाण्डव भाई वसुदेवनन्दन भगवान श्रीकृष्ण और सात्यकि जीवित हैं और उधर कृपाचार्य, कृतवर्मा और विजयी वीरों में श्रेष्ठ अश्वत्थामा जीवित हैं॥36॥   |   mahabharat अध्याय 9.1: संजयके मुखसे शल्य और दुर्योधनके वधका वृत्तान्त सुनकर राजा धृतराष्ट्रका मूर्च्छित होना और सचेत होनेपर उन्हें विदुरका आश्वासन देना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 1: संजयके मुखसे शल्य और दुर्योधनके वधका वृत्तान्त सुनकर राजा धृतराष्ट्रका मूर्च्छित होना और सचेत होनेपर उन्हें विदुरका आश्वासन देना  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  9.1.36 
ते चैव भ्रातर: पञ्च वासुदेवोऽथ सात्यकि:।
कृपश्च कृतवर्मा च द्रौणिश्च जयतां वर:॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
उधर पाँचों पाण्डव भाई वसुदेवनन्दन भगवान श्रीकृष्ण और सात्यकि जीवित हैं और उधर कृपाचार्य, कृतवर्मा और विजयी वीरों में श्रेष्ठ अश्वत्थामा जीवित हैं॥36॥
 
On the other side, the five Pandava brothers, Vasudevanandan, Lord Krishna and Satyaki are alive and on the other side Kripacharya, Kritavarma and Ashwatthama, the best among the victorious heroes, are alive. 36॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)