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mahabharat 9.1.34: हे प्रभु! पाण्डवों और कौरवों के आपसी संघर्ष के कारण आपके पुत्रों और पाण्डवों का शिविर थोड़ा ही बचा है॥34॥   |   mahabharat अध्याय 9.1: संजयके मुखसे शल्य और दुर्योधनके वधका वृत्तान्त सुनकर राजा धृतराष्ट्रका मूर्च्छित होना और सचेत होनेपर उन्हें विदुरका आश्वासन देना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 1: संजयके मुखसे शल्य और दुर्योधनके वधका वृत्तान्त सुनकर राजा धृतराष्ट्रका मूर्च्छित होना और सचेत होनेपर उन्हें विदुरका आश्वासन देना  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  9.1.34 
किञ्चिच्छेषं च शिबिरं तावकानां कृतं प्रभो।
पाण्डवानां कुरूणां च समासाद्य परस्परम्॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
हे प्रभु! पाण्डवों और कौरवों के आपसी संघर्ष के कारण आपके पुत्रों और पाण्डवों का शिविर थोड़ा ही बचा है॥34॥
 
Lord! Due to the mutual conflict between the Pandavas and the Kauravas, only a little bit of your sons and the Pandavas' camp has remained. ॥ 34॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)