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mahabharat 9.1.22-24h: भरतश्रेष्ठ! वह निर्दोष राजा अपनी पुत्रवधुओं, गांधारी, विदुर तथा अन्यान्य सुहृद-मित्रों और बन्धु-बान्धवों से चारों ओर से घिरे हुए बैठे हुए कर्ण की मृत्यु के परिणाम के विषय में विचार कर रहे थे। 22-23 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 9.1: संजयके मुखसे शल्य और दुर्योधनके वधका वृत्तान्त सुनकर राजा धृतराष्ट्रका मूर्च्छित होना और सचेत होनेपर उन्हें विदुरका आश्वासन देना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 1: संजयके मुखसे शल्य और दुर्योधनके वधका वृत्तान्त सुनकर राजा धृतराष्ट्रका मूर्च्छित होना और सचेत होनेपर उन्हें विदुरका आश्वासन देना  »  श्लोक 22-24h
 
 
श्लोक  9.1.22-24h 
तथा चासीनमनघं समन्तात् परिवारितम्॥ २२॥
स्नुषाभिर्भरतश्रेष्ठ गान्धार्या विदुरेण च।
तथान्यैश्च सुहृद्भिश्च ज्ञातिभिश्च हितैषिभि:॥ २३॥
तमेव चार्थं ध्यायन्तं कर्णस्य निधनं प्रति।
 
 
अनुवाद
भरतश्रेष्ठ! वह निर्दोष राजा अपनी पुत्रवधुओं, गांधारी, विदुर तथा अन्यान्य सुहृद-मित्रों और बन्धु-बान्धवों से चारों ओर से घिरे हुए बैठे हुए कर्ण की मृत्यु के परिणाम के विषय में विचार कर रहे थे। 22-23 1/2॥
 
Bharatshrestha! That innocent king was sitting surrounded on all sides by his daughters-in-law, Gandhari, Vidur and other friendly friends and relatives and was thinking about the consequences of Karna's death. 22-23 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)