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mahabharat 9.1.20-21h: हमने देखा कि नगर के श्रेष्ठ पुरुष अचेत और पागल होकर, दुःख से अत्यंत व्याकुल होकर वहाँ दौड़ रहे थे। 20 1/2   |   mahabharat अध्याय 9.1: संजयके मुखसे शल्य और दुर्योधनके वधका वृत्तान्त सुनकर राजा धृतराष्ट्रका मूर्च्छित होना और सचेत होनेपर उन्हें विदुरका आश्वासन देना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 1: संजयके मुखसे शल्य और दुर्योधनके वधका वृत्तान्त सुनकर राजा धृतराष्ट्रका मूर्च्छित होना और सचेत होनेपर उन्हें विदुरका आश्वासन देना  »  श्लोक 20-21h
 
 
श्लोक  9.1.20-21h 
धावतश्चाप्यपश्यामस्तत्र तान् पुरुषर्षभान्॥ २०॥
नष्टचित्तानिवोन्मत्तान् शोकेन भृशपीडितान्।
 
 
अनुवाद
हमने देखा कि नगर के श्रेष्ठ पुरुष अचेत और पागल होकर, दुःख से अत्यंत व्याकुल होकर वहाँ दौड़ रहे थे। 20 1/2
 
We saw that the best men of the city were running there, unconscious and mad, extremely distressed with grief. 20 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)