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mahabharat 9.1.15: नगर में प्रवेश करते हुए, संजय अपने दोनों हाथ ऊपर उठाए, शोक से कांपते हुए, राजमहल के अन्दर चले गए।   |   mahabharat अध्याय 9.1: संजयके मुखसे शल्य और दुर्योधनके वधका वृत्तान्त सुनकर राजा धृतराष्ट्रका मूर्च्छित होना और सचेत होनेपर उन्हें विदुरका आश्वासन देना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 1: संजयके मुखसे शल्य और दुर्योधनके वधका वृत्तान्त सुनकर राजा धृतराष्ट्रका मूर्च्छित होना और सचेत होनेपर उन्हें विदुरका आश्वासन देना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  9.1.15 
स प्रविश्य पुरीं सूतो भुजावुच्छ्रित्य दु:खित:।
वेपमानस्ततो राज्ञ: प्रविवेश निकेतनम्॥ १५॥
 
 
अनुवाद
नगर में प्रवेश करते हुए, संजय अपने दोनों हाथ ऊपर उठाए, शोक से कांपते हुए, राजमहल के अन्दर चले गए।
 
Entering the city, Sanjaya, trembling in grief with both his arms raised, went inside the royal palace.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)