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mahabharat 9.1.0: मनुष्य को अन्तर्यामी नारायण रूपी भगवान श्रीकृष्ण, (उनके नित्य साथी), मनुष्य रूपी अर्जुन, (उनकी लीलाओं को प्रकट करने वाली) देवी सरस्वती तथा (उन लीलाओं का संकलन करने वाले) महर्षि वेदव्यास को नमस्कार करके जय (महाभारत) का पाठ करना चाहिए।   |   mahabharat अध्याय 9.1: संजयके मुखसे शल्य और दुर्योधनके वधका वृत्तान्त सुनकर राजा धृतराष्ट्रका मूर्च्छित होना और सचेत होनेपर उन्हें विदुरका आश्वासन देना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 1: संजयके मुखसे शल्य और दुर्योधनके वधका वृत्तान्त सुनकर राजा धृतराष्ट्रका मूर्च्छित होना और सचेत होनेपर उन्हें विदुरका आश्वासन देना  »  श्लोक 0
 
 
श्लोक  9.1.0 
नारायणं नमस्कृत्य नरं चैव नरोत्तमम्।
देवीं सरस्वतीं व्यासं ततो जयमुदीरयेत्॥०॥
 
 
अनुवाद
मनुष्य को अन्तर्यामी नारायण रूपी भगवान श्रीकृष्ण, (उनके नित्य साथी), मनुष्य रूपी अर्जुन, (उनकी लीलाओं को प्रकट करने वाली) देवी सरस्वती तथा (उन लीलाओं का संकलन करने वाले) महर्षि वेदव्यास को नमस्कार करके जय (महाभारत) का पाठ करना चाहिए।
 
One should recite Jai (Mahabharata) after saluting Lord Krishna in the form of the inner Narayana, (his daily companion) Arjun in the form of a human being, Goddess Saraswati (who reveals his pastimes) and Maharishi Ved Vyas (who compiles those pastimes).
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)