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mahabharat 8.96.65: जो पुण्य मनुष्य को बछड़ों सहित कपिला गौओं का दान करने से एक वर्ष तक प्रतिदिन मिलता है, वही पुण्य केवल कर्ण पर्व के श्रवण मात्र से प्राप्त हो जाता है ॥ 65॥   |   mahabharat अध्याय 8.96: युधिष्ठिरका रणभूमिमें कर्णको मारा गया देखकर प्रसन्न हो श्रीकृष्ण और अर्जुनकी प्रशंसा करना, धृतराष्ट्रका शोकमग्न होना तथा कर्णपर्वके श्रवणकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 96: युधिष्ठिरका रणभूमिमें कर्णको मारा गया देखकर प्रसन्न हो श्रीकृष्ण और अर्जुनकी प्रशंसा करना, धृतराष्ट्रका शोकमग्न होना तथा कर्णपर्वके श्रवणकी महिमा  »  श्लोक 65
 
 
श्लोक  8.96.65 
कपिलानां सवत्सानां वर्षमेकं निरन्तरम्।
यो दद्यात् सुकृतं तद्धि श्रवणात् कर्णपर्वण:॥ ६५॥
 
 
अनुवाद
जो पुण्य मनुष्य को बछड़ों सहित कपिला गौओं का दान करने से एक वर्ष तक प्रतिदिन मिलता है, वही पुण्य केवल कर्ण पर्व के श्रवण मात्र से प्राप्त हो जाता है ॥ 65॥
 
The merit that a person gets by donating Kapila cows along with their calves every day for a year continuously, is the same that can be obtained by merely listening to the Karna Parva. ॥ 65॥
 
इति श्रीमहाभारते कर्णपर्वणि युधिष्ठिरहर्षे षण्णवतितमोऽध्याय:॥ ९६॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत कर्णपर्वमें युधिष्ठिरका हर्षविषयक छानबेवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ९६॥

॥ कर्णपर्व सम्पूर्णम्॥
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)