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mahabharat 8.96.62: अतः जो मनुष्य इस संहिता को नित्य निःसंकोच भाव से सुनता है, वह सब प्रकार के सुखों को प्राप्त करता है। उस महापुरुष पर भगवान विष्णु, ब्रह्मा और महादेवजी भी प्रसन्न होते हैं॥62॥   |   mahabharat अध्याय 8.96: युधिष्ठिरका रणभूमिमें कर्णको मारा गया देखकर प्रसन्न हो श्रीकृष्ण और अर्जुनकी प्रशंसा करना, धृतराष्ट्रका शोकमग्न होना तथा कर्णपर्वके श्रवणकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 96: युधिष्ठिरका रणभूमिमें कर्णको मारा गया देखकर प्रसन्न हो श्रीकृष्ण और अर्जुनकी प्रशंसा करना, धृतराष्ट्रका शोकमग्न होना तथा कर्णपर्वके श्रवणकी महिमा  »  श्लोक 62
 
 
श्लोक  8.96.62 
अतोऽनसूयु: शृणुयात् सदा तु वै
नर: स सर्वाणि सुखानि चाप्नुयात्।
विष्णु: स्वयंभूर्भगवान् भवश्च
तुष्यन्ति ते तस्य नरोत्तमस्य॥ ६२॥
 
 
अनुवाद
अतः जो मनुष्य इस संहिता को नित्य निःसंकोच भाव से सुनता है, वह सब प्रकार के सुखों को प्राप्त करता है। उस महापुरुष पर भगवान विष्णु, ब्रह्मा और महादेवजी भी प्रसन्न होते हैं॥62॥
 
Therefore, the person who always listens to this Samhita without any fault-finding thoughts, attains all kinds of happiness. Even Lord Vishnu, Brahma and Mahadevji are pleased with that great person. ॥ 62॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)