Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 8.96.60: सनातन भगवान विष्णु यज्ञस्वरूप हैं, इन्हें अग्नि, वायु, चन्द्रमा और सूर्य भी कहते हैं। अतः जो मनुष्य अपने मन के कुविचारों को त्यागकर इस यज्ञ का वर्णन पढ़ता या सुनता है, वह सुखी होकर समस्त लोकों में विचरण करता है। 60॥ | mahabharat अध्याय 8.96: युधिष्ठिरका रणभूमिमें कर्णको मारा गया देखकर प्रसन्न हो श्रीकृष्ण और अर्जुनकी प्रशंसा करना, धृतराष्ट्रका शोकमग्न होना तथा कर्णपर्वके श्रवणकी महिमा । mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मखो हि विष्णुर्भगवान् सनातनो
वदन्ति तच्चाग्न्यनिलेन्दुभानव:।
अतोऽनसूयु: शृणुयात् पठेच्च य:
स सर्वलोकानुचर: सुखी भवेत्॥ ६०॥
अनुवाद
सनातन भगवान विष्णु यज्ञस्वरूप हैं, इन्हें अग्नि, वायु, चन्द्रमा और सूर्य भी कहते हैं। अतः जो मनुष्य अपने मन के कुविचारों को त्यागकर इस यज्ञ का वर्णन पढ़ता या सुनता है, वह सुखी होकर समस्त लोकों में विचरण करता है। 60॥
Eternal Lord Vishnu is the form of Yagya, this is also called fire, air, moon and sun. Therefore, the person who abandons his negative thoughts and reads or listens to the description of this war sacrifice, becomes happy and wanders in all the worlds. 60॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥