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mahabharat 8.96.59: जो मनुष्य महात्मा अर्जुन और कर्ण के इस महान युद्धरूपी यज्ञ का पाठ या श्रवण करता है, वह विधिपूर्वक किये गये यज्ञानुष्ठान का फल प्राप्त करता है ॥59॥   |   mahabharat अध्याय 8.96: युधिष्ठिरका रणभूमिमें कर्णको मारा गया देखकर प्रसन्न हो श्रीकृष्ण और अर्जुनकी प्रशंसा करना, धृतराष्ट्रका शोकमग्न होना तथा कर्णपर्वके श्रवणकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 96: युधिष्ठिरका रणभूमिमें कर्णको मारा गया देखकर प्रसन्न हो श्रीकृष्ण और अर्जुनकी प्रशंसा करना, धृतराष्ट्रका शोकमग्न होना तथा कर्णपर्वके श्रवणकी महिमा  »  श्लोक 59
 
 
श्लोक  8.96.59 
इमं महायुद्धमखं महात्मनो-
र्धनंजयस्याधिरथेश्च य: पठेत्।
स सम्यगिष्टस्य मखस्य यत् फलं
तदाप्नुयात् संश्रवणाच्च भारत॥ ५९॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य महात्मा अर्जुन और कर्ण के इस महान युद्धरूपी यज्ञ का पाठ या श्रवण करता है, वह विधिपूर्वक किये गये यज्ञानुष्ठान का फल प्राप्त करता है ॥59॥
 
India The person who recites or listens to this great war-like yajna of Mahatma Arjuna and Karna will attain the fruits of the yagya ritual performed properly. 59॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)